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Bihar News: जहानाबाद सदर अस्पताल में घायल किशोरों के पैर पर कार्टन बांधने का मामला, डॉक्टरों को शोकॉज

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | जहानाबाद सदर अस्पताल में सड़क हादसे में घायल दो किशोरों के पैर पर प्लास्टर की जगह कार्टन बांधने का मामला सामने आया, डीएम ने संबंधित चिकित्सकों को शोकॉज किया।

11 सितंबर, Alam Ki Khabar। जहानाबाद सदर अस्पताल में सड़क हादसे में घायल दो किशोरों के इलाज से जुड़ा मामला सामने आने के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि दोनों घायल किशोरों के पैर में प्लास्टर लगाने के बजाय दवा के खाली कार्टन को काटकर बांधा गया। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित चिकित्सकों से जवाब मांगा है।

जानकारी के अनुसार, हुलासगंज थाना क्षेत्र में धरमपुर मोड़ के पास दो बाइकों की टक्कर में चार किशोर घायल हो गए थे। हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल रामगंज निवासी प्रह्लाद कुमार और धरमपुर निवासी राजा कुमार को इलाज के लिए जहानाबाद सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाया गया।

परिजनों का आरोप है कि दोनों किशोरों के पैर में गंभीर चोट थी और उन्हें तत्काल उपचार की जरूरत थी। इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक ने कथित तौर पर दोनों को पीएमसीएच रेफर कर दिया।

मामला तब चर्चा में आया जब अस्पताल में दोनों किशोरों के पैर पर प्लास्टर के स्थान पर कार्टन बांधे जाने की तस्वीर सामने आई। बताया गया कि दवा के खाली कार्टन को काटकर पैर पर सहारे के तौर पर लगाया गया था। इसी तस्वीर के सामने आने के बाद अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और मरीजों को दिए जाने वाले प्राथमिक उपचार को लेकर सवाल उठने लगे।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मरीज को दूसरे बड़े अस्पताल में रेफर किया जाना था, तो रेफर किए जाने से पहले सदर अस्पताल में उसकी चोट के अनुरूप प्राथमिक उपचार किस स्तर पर किया गया। गंभीर चोट की स्थिति में इस्तेमाल की जाने वाली चिकित्सा सामग्री की जगह कार्टन का इस्तेमाल क्यों किया गया, यह भी जांच का विषय बन गया है।

मामले की जानकारी जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद डीएम छिरिंग वाई भूटिया ने इसे गंभीरता से लिया। डीएम के अनुसार, संबंधित चिकित्सकों को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है और 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।

अब जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि दोनों किशोरों की मेडिकल स्थिति क्या थी, उन्हें किस आधार पर पीएमसीएच रेफर किया गया और रेफर किए जाने से पहले सदर अस्पताल में आवश्यक प्राथमिक उपचार की प्रक्रिया पूरी की गई थी या नहीं।

डॉक्टरों के जवाब और प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्टन से पैर बांधने की स्थिति किन परिस्थितियों में बनी और इसके लिए किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही जिम्मेदार थी या नहीं।

यह मामला केवल दो घायल मरीजों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों, इमरजेंसी व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली तत्काल चिकित्सा सुविधा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है। प्रशासन की जांच से मामले की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय

सरकारी अस्पताल में सड़क हादसे के बाद पहुंचे घायल मरीजों को समय पर और उचित प्राथमिक उपचार मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारी है। सामने आई तस्वीर यदि पूरे मामले को सही रूप में दर्शाती है, तो यह व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की मांग करती है। हालांकि किसी चिकित्सक को दोषी ठहराने से पहले प्रशासनिक जांच और संबंधित डॉक्टरों का पक्ष सामने आना जरूरी है। 24 घंटे में मांगा गया जवाब इस मामले की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में पहला कदम है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही कार्रवाई की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।

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